कोरोना रोगियों पर असरदार है गठिया की दवा


पूरी दुनिया में कोरोना की दवा और वैक्सीन पर काम चल रहा है। इसके बीच एक राहत भरी खबर है। भारतीय मूल के शोधकर्ता के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग टोकिलीज़ुमाब को गंभीर रूप से बीमार कोरोना रोगियों को अगर अस्पताल में भर्ती होने के दो दिनों के भीतर दिया जाए तो मृत्यु दर को 30 फीसद तक कम किया जा सकता है।


हार्वर्ड से संबद्ध ब्रिघम और वूमेन हॉस्पिटल की श्रुति गुप्ता और डेविड ई. लीफ के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने कोरोना से गंभीर रूप से बीमार रोगियों पर टोकिलीजुमाब के प्रभावों की जांच की। उन्होंने पाया कि जब आइसीयू में दाखिल करने के पहले दो दिनों के भीतर ही टोकिलीज़ुमाब को मरीजों को दिया गया तो मरीजों की मृत्यु दर में 30 फीसद की कमी आई। इस अध्ययन का प्रकाशन जर्नल जामा इंटरनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक लीफ ने कहा, टोकिलीजुमाब का इस्तेमाल वर्षो से साइटोकिन रिलीज सिंड्रोम के इलाज में किया जाता रहा है। यह सामान्य तौर पर कैंसर जो कैंसर के रोगियों में देखा जा सकता है।


लीफ ने कहा, कोरोना के मरीजों की जान वायरस से कम, हमारे शरीर के सूजन के कारण अधिक हुई है। वर्तमान में गठिया के रोगियों के लिए टोकिलीजुमाब का इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है। यह सूजन को कम करके रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाले असर को कम करता है। यह अध्ययन अमेरिका के 68 अस्पतालों में भर्ती कोरोना के चार हजार से अधिक गंभीर मरीजों पर किया गया था।