असम में अफ्रीकी स्वाइन फीवर से हुई 2500 सूअरों की मौत


देश में पहली बार अफ्रीकी स्वाइन फीवर का मामला सामने आया है। इस स्वाइन फीवर से अब तक असम के 306 गांवों में 2500 सूअरों की मौत हो गई है। इस बात की जानकारी असम के पशुपालन मंत्री अतुल बोरा ने दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से संक्रमित सूअरों को मारने की मंजूरी मिलने के बाद भी राज्य सरकार वैकल्पिक उपाय ढूंढने की कोशिश में है, ताकि इस बीमारी के संक्रमण को फैलने से रोका जाए। इसके लिए सरकार ने विशेषज्ञों से बात की है, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि क्या हम सूअरों को बिना मारे बचा सकते हैं ? 


अफ्रीकी स्वाइन फीवर से संक्रमित सूअरों की मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत है। इसलिए सरकार ने सूअरों को बचाने के लिए कुछ रणनीतियां बनाई हैं, जो कि वायरस से प्रभावित नहीं है। जिन क्षेत्रों में यह वायरस फैला है, उन इलाकों के एक किलोमीटर रेडियस में सैंपल लेकर उसका परीक्षण किया जाएगा, जिसका परीक्ष्णा असम के तीन प्रयोगशालाओं में किया जाएगा। परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद केवल संक्रमित सूअरों को मारा जाएगा। 


अफ्रीकी स्वाइन फीवर क्या है


आम तौर पर यह बीमारी सूअरों को होती है। इसके मनुष्य में फैलने की आशंका बहुत कम है। यह वायरस Asfarviridae परिवार से संबंध रखता है। इस वायरस से संक्रमित होने के बाद सूअरों की एक सप्ताह में मौत हो जाती है। इसके लक्षण तेज बुखार, उल्टी, दस्त, सांस लेने में तकलीफ और खांसी है। इस वायरस का सबसे पहला मामला 1907 ई में केन्या में आया था। इसके बाद यह अफ्रीका और फिर पुर्तगाल में फैला था। हाल के दिनों में यह वायरस चीन में बड़ी तेजी से फैला था, जिससे चीन में सूअरों की कुल आबादी की 40 फीसदी सूअर मर गए थे।


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